नेताजी सुभाषचन्द्र बोस पर निबंध (300 & 500 words) – Essay on Netaji Subhash Chandra Bose in Hindi

नेताजी सुभाषचन्द्र बोस पर बहुत सुन्दर और प्यारा निबंध । इस से अच्छा नेताजी सुभाषचन्द्र बोस पर निबंध आपको कही नहीं मिलेंगे। Essay on Netaji Subhash Chandra Bose in Hindi (Simple and Attractive). आज हम नेताजी सुभाषचन्द्र बोस पर एक प्यारा और आकर्षक निबंध लिखेंगे। 

नेताजी सुभाषचन्द्र बोस पर निबंध  – Essay on Netaji Subhash Chandra Bose in Hindi

परिचय : नेताजी सुभाषचन्द्र बोस का जन्म उड़ीसा प्रांत के कटक शहर में 23 जनवरी 1897 ईस्वी में हुआ था। इनके पिता रायबहादुर जानकी नाथ बोस कटक नगरपालिका तथा जिला बोर्ड के प्रधान तथा नगर के गणमान्य वकीलों में से थे। 

शिक्षा : नेताजी सुभाषचन्द्र बोस के प्रारंभिक शिक्षा एक यूरोपियन स्कूल में हुई। बाद में इन्होंने रेवन्यू कॉलेजिएट स्कूल से प्रवेशिका परीक्षा में पटना विश्वविद्यालय में दूसरा स्थान प्राप्त किया। इनके बाद इन्होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज में प्रवेश किया। वहां ओटन नामक अंग्रेज प्रोफेसर था जो सदैव भारतीयों के प्रति निन्दाजनक शब्द कहा करता था। स्वाभिमानी सुभाष के लिए असहाय था। उन्होंने कक्षा में ही एक दिन उसको एक चांटा जड़ दिया।

उस दिन से ही उसने भारतीयों की निंदा करनी तो बंद कर दी परंतु सुभाष चंद्र को कॉलेज से निकाल दिया गया। इसके पश्चात वे स्कॉटिश चर्च कॉलेज में प्रविष्ट हुए और कोलकाता विश्वविद्यालय से बीए ऑनर्स की परीक्षा पास की। सन 1919 में वे भारतीय सिविल सर्विस की परीक्षा पास करने के लिए इंग्लैंड चले गए। 6 महीना के कठोर परिश्रम से उस परीक्षा में चौथे स्थान प्राप्त करके पास हो गए। आई सी एस की परीक्षा पास करके भारत लौट आए और नौकरशाही की पोशाक मशीन का पुर्जा बनने से साफ़ इंकार क्र दिया। 

समाज सेवा : सुभाष बाबू के जीवन पर देशबंधु चितरंजन दास के त्याग और तपस्या का बहुत गहरा प्रभाव पड़ा। वे उनके कार्यों में सहयोग देने लगे। चितरंजन दास द्वारा निकाले गए आगरा में पत्र का संपादन भार उन्होंने अपने ऊपर ले लिया। सन् 1921 में उन्होंने स्वयंसेवकों का संगठन कार्यक्रम किया। फलस्वरूप विदेशी सरकार ने इन्हें गिरफ्तार कर लिया। प्रिंस ऑफ वेल्स भारत आए। समस्त भारत में उनका बायकाट किया गया। सुभाष ने बंगाल में इस आयोजन का नेतृत्व किया। देशबंधु द्वारा आयोजित स्वराज पार्टी में उन्होंने तन मन धन से पूर्ण सहयोग दिया। ब्रिटिश सरकार ने इनके विध्वंसक कार्यों के कारण उन्हें 25 अक्टूबर 1926 ईस्वी को मांडले जेल भेज दिया। परंतु स्वास्थ्य खराब हो जाने कारण 17 मई 1927 को उन्हें मुक्त कर दिया गया। उस समय तक देशबंधु की मृत्यु हो चुकी थी। 

कांग्रेस के सक्रिय कार्यकर्ता : 1939 ईस्वी मेंये गाँधी जी की इच्छा की अवहेलना करके कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए पुनः खड़े हुए। कांग्रेस के इतिहास में यह चुनाव अत्यधिक संघर्ष का था। जब नेताजी सुभाषचन्द्र बोस गांधी जी के कहने से ना माने तो गांधी जी ने अपने प्रभाव डॉक्टरी सीतारामय्या को विरोधी उम्मीदवार के रूप में खड़ा कर दिया। अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी का चुनाव हुआ। सुभाष 203 वोटों से विजय हुए सीतारामय्या की करारी हार हुई। गांधीजी ने इसे अपना व्यक्तिगत हार मानी। सुभाष बाबू ने त्रिपुरा कांग्रेस अधिवेशन का समापन किया। गांधी जी ने कांग्रेस छोड़ देना की धमकी दी। सुभाष बाबू यह नहीं चाहते थे इसलिए कुछ दिनों के बाद उन्होंने इस पद से त्यागपत्र दे दिया और आगामी दल के गठन कर लिया। 

आजाद हिंद फौज का गठन : सुभाष बाबू सब की आंखों में धूल झोंकते हुए आधी रात के समय मौलवी के वेश में घर से बाहर निकल गए। ये कोलकाता से पेशावर गए। वहां उत्तम चंद्र की सहायता प्राप्त करके एक गूंगे मुसलमान के रूप में काबुल होते हुए जर्मनी पहुंचे। वहां उन्होंने आजाद हिंद फौज की नींव डाली। 5 जुलाई 1943 ईस्वी को सुभाष ने इस सेना का नेतृत्व संभाला। 1945 में सुभाष भारत माता की परतंत्रता की बेड़ियों को काटने के लिए दूसरा भयानक आक्रमण किया। परंतु जर्मनी के हार के साथ आजाद हिंद फौज का भाग भी बदल गया। सैनिक गिरफ्तार कर लिया गया। 

मृत्यु : हवाई जहाज द्वारा नेताजी जापान जा रहे थे। रास्ते में हवाई जहाज में आग लग गई ऐसा कहा जाता है कि 19 अगस्त 1945 को वे इस संसार छोड़कर चल बसे। 

उपसंहार : नेताजी सुभाषचन्द्र बोस भारतीय जनमानस के नेता थे। आपका नाम इतिहास में सदा अमर रहेगा। 

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