प्रदूषण पर निबंध : Essay on Pollution in Hindi

हम जानते है की प्रदूषण आज दुनिया की एक गंभीर समस्या बन गया है। प्रकृति और पर्यावरण में होने वाले प्रदूषण हमारे लिए आज बहुत बड़ी समस्या बनता जा रहा है जो हमारे प्रकृति और मनुष्य के जीवन पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है। आज प्रदूषण भारी चिंता का विषय बन गया है। इसकी चपेट में मानव-समुदाय ही नहीं, समस्त जीव-समुदाय आ गया है । इसके दुष्प्रभाव चारों ओर दिखाई दे रहे हैं। इस से अच्छ प्रदूषण पर निबंध आपको कही नहीं मिलेंगे।  Essay on Pollution  in Hindi (Simple and Attractive). आज हम प्रदूषण पर एक प्यारा और आकर्षक निबंध लिखेंगे। हम उम्मीद करते है की प्रदूषण पर निबंध आपको पसंद आये।

प्रदूषण पर निबंध  – Eassy on Pollution

भूमिका : मानव जीवन सदैव पर्यावरण से प्रभावित रहता है। अतः मानव जीवन सुचारू रूप से चले, इसके लिए  ‘सतुलित पर्यावरण’ बहुत आवश्यक है। संतुलित पर्यावरण से सभी तत्व एक निश्चित अनुपात में विधमान रहते है। किन्तु जब उसमे विषैले तत्वो की अथवा किसी एक तत्व की अधिकता या कमी हो जाती है, तो वारावरण दुषित हो जाता है। इसे ही ‘प्र्दुषण’ कहा जाता है। 

प्रदूषण का अर्थ : प्रदूषण  से तात्पर्य जलवायु या भूमि में भौतिक, रासायनिक और जैविक गुण में होने वाला अवांछनीय परिवर्तन है, जिससे मानव जीवन, जीव-जंतु, पेड़-पौधे इत्यादि को छति पहुँच सकती है। कोई भी वस्तु जो प्रयोग करने के बाद फेक दी जाती है, प्रदूषण को बढ़ती है। 

प्रदूषण के प्रकार : प्रदूषण विभिन्न प्रकार के होते है ; यथा -वायु-प्रदूषण, जल-प्रदूषण और ध्वनि-प्रदूषण आदि। इनमे सबसे अधिक हानिकारक वायु-प्रदूषण है।  वायुमंडल में गैसों की मात्रा निचित होती है। इनमे ज्यादा मात्रा ऑक्सीजनऔर नइट्रोजन  की होती है। मानव जब सॉस  छोड़ते है, तो कार्बन-डाइआक्साइड निकलते है। 

बड़े-बड़े नगरो में अनेक प्रकार के वाहन, लावस्पीकर, बाजे एवं औधोगिक संस्थानों की मशीनों के शोर से ध्वनि-प्रदूषण उतपन्न होता है। इससे मानव की सुनने की शक्ति कम होती है और उसके मस्तिक पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। परमाणु शक्ति के उत्पादन व नाभिकीय विखण्डन ने वायु, जल व ध्वनि, तीनो प्रदूषणो को काफी बढ़ा दिया है। अतः इस समस्या का निराकरण होना चाहिए, अन्यथा इसके भयंकर परिणाम आगे आने वाली पीढ़ियों को भी भुगतना पड़ेगा। 

प्रदूषण की समस्या के निराकरण के उपाय : प्रदूषण की समस्या से बचने के लिए निम्न्लिखित उपायों पर अमल करना आवश्यक है। 

  • नये-नये  पेड़ लगने से भी प्रदूषण रोका जा सकता है, क्योकी वे वातवरण को स्वच्छ रखते है और आक्सीजन छोड़ते है, जिससे सभी प्राणियों को सुविधा को सास लेने में सुविधा रहती है। 
  • वनो के विनाश पर रोक लगायी जाए, क्योकि वन भी पर्यावरण को प्रदूषण से बचता है। 
  • बस्ती व नगर में स्वच्छता व सफाई अभियान चलाये जाए  और सब लोगो को स्वच्छता व सफाई के लाभों का ज्ञान कराया जाए। 
  • परमाणु विस्फोटो और परमाणु परिछीनो पर पूर्ण नियत्रण रखा जाए। 
  • पीने का पानी स्वच्छ होना चाहिए , खास तौर पर गावो के लोग उसी कूय से पानी पि लेते है और वही कपड़े भी धो लाइट है.जो की ठीक नहीं है। 

किसानों को कीटनाशक दवाओं के बारे में पूर्ण ज्ञान न होने के कारण वे उनका आवश्यकता से अधिक उपयोग करते है।  वर्षा होने पर वह दवा खेत में भरे पानी के साथ गंगा के पानी में जाकर मिल जाती है, जो गंगाजल को प्रदूषित करती  है वोज्ञानिक  गंगाजल को रेडियोधर्मित का भी अध्यन क्र रहे है, किन्तु इसमें अभी तक वे पूर्ण रूप से सफल नहीं हो पाए है। 

उपसंहार : इतने प्रयासों के बावजूद प्रदूषण की अभी पाया है, क्योकि औधोगिक विकास, गरीकरण,वनो का विनाश और जनसंख्या में अत्यधिक विद्धि के कर यह समस्या बढ़ती जा रही है।  संयुक्त राष्ट्रसंघ  की एक संस्थाओ, जैसी -विश्व स्वास्थ्य संगठन, विश्व पर्यायवरण संस्थन ने प्रदूषण को दूर करने के भरसक प्रयत्न किये है, किन्तु सफल नहीं हो पाए है। इस समस्या का समाधान अतिशीघ्र होना चाहिए, अन्यथा  पर  प्रभाव बहुत बुरे होंगे। 

Also Read:-

Leave a Comment