रवीन्द्रनाथ ठाकुर पर निबंध(300 & 500 words) – Essay on Rabindranath Tagore in Hindi

रवीन्द्रनाथ ठाकुर पर बहुत सुन्दर और प्यारा निबंध । इस से अच्छा रवीन्द्रनाथ ठाकुर पर निबंध आपको कही नहीं मिलेंगे। Essay on Rabindranath Tagore in Hindi (Simple and Attractive). आज हम रवीन्द्रनाथ ठाकुर पर एक प्यारा और आकर्षक निबंध लिखेंगे। 

रवीन्द्रनाथ ठाकुर पर निबंध – Essay on Rabindranath Tagore in Hindi

परिचय : रवीन्द्रनाथ ठाकुर का जन्म 8 मई 1861 ईस्वी में कोलकाता के जोड़ासाँको के प्रसिद्ध ठाकुर घराने में हुआ था। इनके पिता जी का नाम महाऋषि देवेंद्रनाथ ठाकुर था। 

सहित एवं कला से प्रेम : बचपन में रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने अपने पिताजी से संस्कृत व्याकरण ज्योतिषी आदि विधाओं का अध्ययन किया था। बचपन से ही वह कविता लिखते थे। 13 वर्ष की आयु में उनकी पहली कविता प्रकाशित हुई थी। संगीत से भी उन्हें बड़ा लगाव था। गीतांजलि इनके लिखने की अमर देन है। इस पुस्तक पर उन्हें नोबेल पुरस्कार मिला। 

देश प्रेम : रवीन्द्र नाथ ठाकुर में देशप्रेम की भावना कूट-कूट कर भरे हुए थे। गांधी जी इनका सम्मान करते थे। वह उन्हें गुरुदेव कहकर पुकारते थे। रवि बाबू ने ही भारतीय सभ्यता का संदेश भेज जो  विश्व को दिया। उन्होंने विश्व भारती की नींव डाली। जन गण मन अधिनायक जय है राष्ट्रीय गीत इन्हीं का लिखा हुआ है। इन्होंने बोलपुर में संस्कृत के शिक्षा के अध्ययन के लिए शांति निकेतन की स्थापना की। 

मृत्यु : 1941 ईस्वी की 7 अगस्त को उनकी मृत्यु हो गई, किंतु वे  मरकर भी अमर हो गए। भगवान हमारे कवि की आत्मा को चिर शांति प्रदान करें। 

उपसंहार : विश्व कवि रवीन्द्रनाथ ठाकुर के लिखे गीत-संगीत, कहानियां एवं नाटक प्रेरणा के स्त्रोत है। बंगाल में रविंद्र संगीत को बड़े ही श्रद्धा के साथ नियम पूर्वक गाया जाता है। 

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