होली पर निबंध (300 & 500 words) – Essay on Holi in Hindi

होली पर बहुत सुन्दर और प्यारा निबंध । इस से अच्छा होली पर निबंध आपको कही नहीं मिलेंगे। Essay on Holi in Hindi (Simple and Attractive ). आज हम होली पर एक प्यारा और आकर्षक निबंध लिखेंगे। हम उम्मीद करते है की होली पर निबंध आपको पसंद आये।

होली पर निबंध – Essay on Holi in Hindi

परिचय : होली हिंदुओं का एक मुख्य पर्व है। पूरे भारत में यह पर्व बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। 

इतिहास : प्राचीन काल में हिरण्यकश्यप नामक एक अत्याचारी राजा था। उनके पुत्र का नाम पहलाद था। पहलाद ईश्वर भक्ता था। पिता ने पुत्र को मार डालने की काफी कोशिश की पर उसे सफलता ना मिली। अंत में उसने अपनी बहन होलिका को आदेश दिया कि पहलाद को गोद में लेकर आग में बैठे।

होलिका को वरदान मिला था कि वह स्वयं आग में नहीं जल सकती लेकिन उसे किसी दूसरे आदमी को लेकर आग मैं बैठने का वरदान नहीं था। इसलिए होलिका आग में जलकर राख हो गई। पहलाद भगवान का नाम लेता हुआ आग  से निकल पड़ा। दूसरे दिन इसी खुशी में उत्सव मनाया गया। इसे उत्सब को होलीका उत्सव कहते हैं। होली चैत्र महीने के प्रथम दिन को मनाई जाती है। 

उत्सव : एक महीना पहले से ही होलिका दहन के लिए लकड़ियां इकट्ठी की जाती है। संध्या के समय शुभ मुहूर्त देखकर पूजा होती है और होलिका जलाई जाती है। दूसरे दिन लोगों के रंग अबीर से होली खेलते हैं। होली बच्चों से लेकर बूढ़े तक खेलते हैं। 

उपसंहार : होली पवित्र त्यौहार है लेकिन कुछ लोग यह दिन नशा-पान पर अनुचित कार्य कर बैठते हैं। जो समाज के लिए कलंक है। होली हमारे लिए प्रेम, मैत्री तथा सौहार्द का संदेश लेकर आती है। 

 

होली पर निबंध – Essay on Holi in Hindi Simple and Attractive 

होली रंगों का एक प्रसिद्ध त्योहार है जो हर साल फागुन के महीने में भारत के लोगों द्वारा बड़ी खुशी के साथ मनाया जाता है। ये ढ़ेर सारी मस्ती और खिलवाड़ का त्योहार है खास तौर से बच्चों के लिये जो होली के एक हफ्ते पहले और बाद तक रंगों की मस्ती में डूबे रहते है। हिन्दु धर्म के लोगों द्वारा इस त्योहार को पूरे भारतवर्ष में मार्च के महीने में मनाया जाता है।

सालों से भारत में होली मनाने के पीछे कई सारी कहानीयाँ और पौराणिक कथाएं है। इस उत्सव का अपना महत्व है, हिन्दु मान्यतों के अनुसार होली का पर्व बहुत समय पहले प्राचीन काल से मनाया जा रहा है जब होलिका अपने भाई के पुत्र को मारने के लिये आग में लेकर बैठी और खुद ही जल गई।

उस समय एक राजा था हिरण्यकशयप जिसका पुत्र प्रह्लाद था और वो उसको मारना चाहता था क्योंकि वो उसकी पूजा के बजाय भगवान विष्णु की भक्ती करता था। इसी वजह से हिरण्यकशयप ने होलिका को प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर आग में बैठने को कहा जिसमें भक्त प्रह्लाद तो बच गये लेकिन होलिका मारी गई।

जबकि, उसकी ये योजना भी असफल हो गई, क्योंकि वो भगवान विष्णु का भक्त था इसलिये प्रभु ने उसकी रक्षा की। षड़यंत्र में होलिका की मृत्यु हुई और प्रह्लाद बच गया। उसी समय से हिन्दु धर्म के लोग इस त्योहार को मना रहे है। होली से ठीक एक दिन पहले होलिका दहन होता है जिसमें लकड़ी, घास और गाय के गोबर से बने ढ़ेर में इंसान अपने आप की बुराई भी इस आग में जलाता है।

होलिका दहन के दौरान सभी इसके चारों ओर घूमकर अपने अच्छे स्वास्थय और यश की कामना करते है साथ ही अपने सभी बुराई को भस्म करते है। इस त्योहार में ऐसी मान्यता भी है कि सरसों से शरीर पर मसाज करने पर सारे रोग और बुराई दूर हो जाती है और साथ ही साल भर तक सेहतमंद और दुरुस्त रहती है।

होलिका दहन की अगली सुबह के बाद, लोग रंग-बिरंगी होली को एक साथ मनाने के लिये एक जगह इकठ्ठा हो जाते है। इसकी तैयारी इसके आने से एक हफ्ते पहले ही शुरु हो जाती है, फिर क्या बच्चे और क्या बड़े सभी बेसब्री से इसका इंतजार करते है और इसके लिये ढ़ेर सारी खरीदारी करते। यहाँ तक कि वो एक हफ्ते पहले से ही अपने दोस्तों, पड़ोसियों और प्रियजनों के साथ पिचकारी और रंग भरे गुब्बारों से खेलना शुरु कर देते। इस दिन लोग एक-दूसरे के घर जाकर रंग गुलाल लगाते साथ ही मजेदार पकवानों का आनंद लेते।

Also Read –

Leave a Comment